कड़वा सच एक और दिन, एक और झूठा वादा | अदालतों की चौखट पर न्याय की आस में बूढ़े होते माँ-बाप | क्या कोई है जो हमारी आवाज़ सुनेगा? | सत्ता के गलियारों में आम आदमी की चीख गुम है...

NYAY
KAB MILEGA?

इस देश में भ्रष्टाचार कब खत्म होगा?
क्या वर्तमान सरकार या कोई भी व्यवस्था जनता की आवाज़ सुनने वाली है?

पीड़ित आज भी थानों, अदालतों और सरकारी दफ्तरों के बाहर रो रहे हैं। फाइलें धूल खा रही हैं और रक्षक ही भक्षक बन बैठे हैं। क्या सच में कभी कोई बदलाव आएगा, या हम बस एक वोट बैंक बनकर ऐसे ही तिल-तिल कर मरते रहेंगे?

0M+ Pending Court Cases
अनंत टूटे हुए वादे
0 जवाबदेही (Accountability)
0% अंडरट्रायल कैदी जो न्याय को तरस रहे हैं

KAB TAK SAHENGE?

एक आम आदमी जब अपना हक मांगने जाता है, तो उसे नियमों की जंजीरों में बांध दिया जाता है। एक गरीब की एफआईआर (FIR) दर्ज होने में महीनों लग जाते हैं, जूतियां घिस जाती हैं, जबकि एक रसूखदार का काम एक फोन कॉल पर हो जाता है।

क्या यही वो आज़ाद भारत है जिसका सपना हमने देखा था? सरकारें बदलती हैं, बड़े-बड़े वादे होते हैं, 'विकास' और 'नए युग' की बातें होती हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि आज भी बिना रिश्वत दिए एक मृत्यु प्रमाण पत्र तक नहीं बनता।

अगर यही हाल रहा, तो यह देश आम इंसान के रहने लायक नहीं बचेगा। जिन पुलिसवालों को वर्दी जनता की रक्षा और काम करने के लिए दी गई थी, वो आज उसी वर्दी की आड़ में पीड़ितों को नोंच खा रहे हैं, रिश्वतें ले रहे हैं और सत्ता की चमचागिरी कर रहे हैं। वर्दी काम करने के लिए दी गई है, रिश्वत खाने और जनता को प्रताड़ित करने के लिए नहीं!

जो पुलिसकर्मी रक्षक के भेष में भक्षक बन चुके हैं, उन पर इतनी खौफनाक और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए कि रिश्वत का नाम सुनते ही उनकी रूह कांप जाए। ऐसे गद्दारों को सीधे तौर पर बर्खास्त कर सबसे कठोर सजा दी जानी चाहिए। इन्हीं चंद दीमकों और भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से पूरी व्यवस्था खोखली हो चुकी है, और आज जनता के दिलों में सरकार और सिस्टम के लिए सिर्फ और सिर्फ नफरत भर चुकी है।

सिस्टम अंधा है
फाइलों में दबता सच
आम आदमी की हार
कुर्सी का खेल
इंसाफ की भीख
रक्षक बने भक्षक
सिस्टम अंधा है
फाइलों में दबता सच
आम आदमी की हार
कुर्सी का खेल
इंसाफ की भीख
रक्षक बने भक्षक
```